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8.44.4
उत्ते॑ बृ॒हन्तो॑ अ॒र्चयः॑ समिधा॒नस्य॑ दीदिवः । अग्ने॑ शु॒क्रास॑ ईरते ॥ (४)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.44.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे दीप्तिशाली अग्नि! जब तुम प्रज्वलित होते हो, तब तुम्हारी बढ़ी हुई एवं ज्वलंत किरणें ऊपर उठती हैं. (४)
EN English Translation
O glorious agni! When you are ignited, your enlarged and vivid rays rise. (4)