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8.45.10
वृ॒ज्याम॑ ते॒ परि॒ द्विषोऽरं॑ ते शक्र दा॒वने॑ । ग॒मेमेदि॑न्द्र॒ गोम॑तः ॥ (१०)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे इंद्र! हम याचना करने के लिए तुम्हारे शत्रुओं के पास न जावें. हे गायों वाले एवं पर्याप्त दाता इंद्र! हम तुम्हारे पास जावें. (१०)
EN English Translation
O Indra! Let us not go to your enemies to beg. O indra, the cows and the giver enough! Let's go to you. (10)