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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 2

8.45.2

Mantra ID: 8.45.2

बृ॒हन्निदि॒ध्म ए॑षां॒ भूरि॑ श॒स्तं पृ॒थुः स्वरुः॑ । येषा॒मिन्द्रो॒ युवा॒ सखा॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

युवा इंद्र जिनके मित्र हैं, उन ऋषियों की समिधाएं बड़ी हैं, स्तोत्र बहुत हैं और यज्ञ महान्‌ हैं. (२)

EN English Translation

The young Indras who have friends, the sages have great committees, many hymns and yajnas are great. (2)

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