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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 22

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 22

8.45.22

Mantra ID: 8.45.22

अ॒भि त्वा॑ वृषभा सु॒ते सु॒तं सृ॑जामि पी॒तये॑ । तृ॒म्पा व्य॑श्नुही॒ मद॑म् ॥ (२२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्तिशाली इंद्र! सोमरस निचुड़ जाने पर मैं सोमरस पीने के लिए तुम्हें देता हूं. तुम तृप्त बनो एवं नशीला सोमरस पिओ. (२२)

EN English Translation

O mighty Indra! When the Somras go to Nichud, I give you somers to drink. You be satisfied and drink intoxicating somras. (22)

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