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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 26

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 26

8.45.26

Mantra ID: 8.45.26

अपि॑बत्क॒द्रुवः॑ सु॒तमिन्द्रः॑ स॒हस्र॑बाह्वे । अत्रा॑देदिष्ट॒ पौंस्य॑म् ॥ (२६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.26 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुमने कद्रु ऋषि द्वारा निचोड़ा गया सोमरस पिया एवं उनके शत्रुओं को मारा. इस अवसर पर इंद्र का पुरुषार्थ उद्दीप्त हुआ. (२६)

EN English Translation

O Indra! You drank the somras squeezed by the sage Kadru and killed his enemies. Indra's purushartha was stirred on the occasion. (26)

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