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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 28

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 28

8.45.28

Mantra ID: 8.45.28

त॒रणिं॑ वो॒ जना॑नां त्र॒दं वाज॑स्य॒ गोम॑तः । स॒मा॒नमु॒ प्र शं॑सिषम् ॥ (२८)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.28 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे स्तोताओ! तुम्हारे पुत्र-पौत्रादि के तारक, शत्रुनाशक, गायों से युक्त अन्न देने वाले एवं सबके प्रति समान इंद्र की मैं स्तुति करता हूं. (२८)

EN English Translation

This stotao! I praise Indra, as your son and grandson's tarak, the enemy destroyer, the giver of food containing cows, and to all. (28)

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