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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 45 • Mantra / Rik 32

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 45 • ऋचा / मन्त्र 32

8.45.32

Mantra ID: 8.45.32

द॒भ्रं चि॒द्धि त्वाव॑तः कृ॒तं श‍ृ॒ण्वे अधि॒ क्षमि॑ । जिगा॑त्विन्द्र ते॒ मनः॑ ॥ (३२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.45.32 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम्हारे समान थोड़ा भी कर्म करने वाला व्यक्ति धरती पर प्रसिद्ध हो जाता है. तुम्हारा मन मेरे पास आवे. (३२)

EN English Translation

O Indra! A person who does even a little bit of work like you becomes famous on earth. Come your mind to me. (32)

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