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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 46 • Mantra / Rik 16

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 16

8.46.16

Mantra ID: 8.46.16

विश्वे॑षामिर॒ज्यन्तं॒ वसू॑नां सास॒ह्वांसं॑ चिद॒स्य वर्प॑सः । कृ॒प॒य॒तो नू॒नमत्यथ॑ ॥ (१६)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.46.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

समस्त संपत्तियों के स्वामी, शत्रुओं को रोकने वाले, युद्ध में शत्रु को कंपित करने वाले एवं हराने वाले इंद्र की स्तुति करो. इंद्र शीघ्र धन देंगे. (१६)

EN English Translation

Praise Indra, the master of all possessions, the one who stopped the enemies, the one who shook the enemy in battle and defeated him. Indra will give quick money. (16)

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