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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 46 • Mantra / Rik 7

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 46 • ऋचा / मन्त्र 7

8.46.7

Mantra ID: 8.46.7

तस्मि॒न्हि सन्त्यू॒तयो॒ विश्वा॒ अभी॑रवः॒ सचा॑ । तमा व॑हन्तु॒ सप्त॑यः पुरू॒वसुं॒ मदा॑य॒ हर॑यः सु॒तम् ॥ (७)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.46.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सब जगह जाने वाली, भीरुतारहित एवं सहायक मरुत्सेना इंद्र की है. गतिशील हरि नामक अश्व बहुत धन वाले इंद्र को निचोड़े हुए सोमरस के निकट प्रसन्नता के लिए ले आवे. (७)

EN English Translation

Going everywhere, without awe and helper is of Marutsena Indra. Bring the horse called The Dynamic Hari to the very rich Indra near the squeezed Somras for pleasure. (7)

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