Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 47 • Mantra / Rik 13

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 47 • ऋचा / मन्त्र 13

8.47.13

Mantra ID: 8.47.13

यदा॒विर्यद॑पी॒च्यं१॒॑ देवा॑सो॒ अस्ति॑ दुष्कृ॒तम् । त्रि॒ते तद्विश्व॑मा॒प्त्य आ॒रे अ॒स्मद्द॑धातनाने॒हसो॑ व ऊ॒तयः॑ सुऊ॒तयो॑ व ऊ॒तयः॑ ॥ (१३)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.47.13 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे आदित्य देवो! जो छिपे हुए अथवा स्पष्ट पाप हैं, उन में से एक भी मुझ आप्त्यत्रित को न हो. मुझसे पापों को दूर रखो. तुम्हारी रक्षा उपद्रवरहित एवं शोभन है. (१३)

EN English Translation

Hey Aditya Devo! Not one of those which are hidden or clear sins should be to my enemies. Keep sins away from me. Your defense is hassle-free and adorning. (13)

卐 HinduText AI