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8.47.2
वि॒दा दे॑वा अ॒घाना॒मादि॑त्यासो अ॒पाकृ॑तिम् । प॒क्षा वयो॒ यथो॒परि॒ व्य१॒॑स्मे शर्म॑ यच्छताने॒हसो॑ व ऊ॒तयः॑ सुऊ॒तयो॑ व ऊ॒तयः॑ ॥ (२)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.47.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे आदित्य देवो! तुम पापों को दूर करना जानते हो. पक्षी जिस प्रकार अपने बच्चों के ऊपर पंख फैला लेते हैं, उसी प्रकार तुम हमें सुख दो. तुम्हारी रक्षाएं उपद्रवरहित एवं शोभन हैं. (२)
EN English Translation
Hey Aditya Devo! You know how to remove sins. Just as birds spread wings over their children, so do you give us happiness. Your defenses are hassle-free and benign. (2)