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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 48 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 48 • ऋचा / मन्त्र 9

8.48.9

Mantra ID: 8.48.9

त्वं हि न॑स्त॒न्वः॑ सोम गो॒पा गात्रे॑गात्रे निष॒सत्था॑ नृ॒चक्षाः॑ । यत्ते॑ व॒यं प्र॑मि॒नाम॑ व्र॒तानि॒ स नो॑ मृळ सुष॒खा दे॑व॒ वस्यः॑ ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.48.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! तुम हमारे शरीर के रक्षक यज्ञकर्म के प्रत्येक अंग के नेताओं को देखने वाले एवं बैठने वाले हो. हे देव! हम तुम्हारे व्रतों में विघ्न डालते हैं, फिर भी तुम उत्तम मित्र एवं रेष्ठ अन्न वाले बनकर हमें सुखी करो. (९)

EN English Translation

Hey Mon! You are the protector of our body who will see and sit the leaders of every organ of yajnakarma. Oh, God! We interrupt your vows, yet make us happy by becoming good friends and with the best food. (9)

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