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8.49.16
स॒प्त होता॑र॒स्तमिदी॑ळते॒ त्वाग्ने॑ सु॒त्यज॒मह्र॑यम् । भि॒नत्स्यद्रिं॒ तप॑सा॒ वि शो॒चिषा॒ प्राग्ने॑ तिष्ठ॒ जना॒ँ अति॑ ॥ (१६)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.49.16 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अभिमत देने वाले, क्षीणतारहित एवं अपने तापपूर्ण तेज से मेघ को छिन्न-भिन्न करने वाले अग्नि! सात स्तोता तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम मनुष्यों को लांघकर हमारे पास आओ. (१६)
EN English Translation
O agni that gives opinion, is weak and shatters the cloud with its warmest! The seven psalms praise you. You cross the human beings and come to us. (16)