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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 49 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 49 • ऋचा / मन्त्र 2

8.49.2

Mantra ID: 8.49.2

अच्छा॒ हि त्वा॑ सहसः सूनो अङ्गिरः॒ स्रुच॒श्चर॑न्त्यध्व॒रे । ऊ॒र्जो नपा॑तं घृ॒तके॑शमीमहे॒ऽग्निं य॒ज्ञेषु॑ पू॒र्व्यम् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.49.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे बल के पुत्र एवं अंगिरागोत्रीय अग्नि! यज्ञ में तुम्हें प्राप्त करने के लिए खुच चलते हैं. हम पालनकर्ता, प्रदीप्त ज्वाला वाले एवं प्राचीन अग्नि की यज्ञ में स्तुति करते हैं. (२)

EN English Translation

O son of force and agni! Let's go to get you in the yajna. We praise the sustainer, the illuminated flame and the ancient agni in the yagna. (2)

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