Rigveda Quick Jump
Navigate to any Mandal or Mantra / Rik
8.50.14
त्वं हि रा॑धस्पते॒ राध॑सो म॒हः क्षय॒स्यासि॑ विध॒तः । तं त्वा॑ व॒यं म॑घवन्निन्द्र गिर्वणः सु॒ताव॑न्तो हवामहे ॥ (१४)
HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें
ऋग्वेद मन्त्र 8.50.14 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे धनस्वामी इंद्र! तुम्हीं सेवक का महान् धन एवं घर बढ़ाते हो. हे धनस्वामी एवं स्तुतिपात्र अग्नि! हम सोमरस निचोड़ने वाले तुम्हें बुलाते हैं. (१४)
EN English Translation
O Lord Indra! You increase the great wealth and home of the servant. O Lord of Wealth and Praise! We call you somers squeezing. (14)