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8.50.15
इन्द्रः॒ स्पळु॒त वृ॑त्र॒हा प॑र॒स्पा नो॒ वरे॑ण्यः । स नो॑ रक्षिषच्चर॒मं स म॑ध्य॒मं स प॒श्चात्पा॑तु नः पु॒रः ॥ (१५)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.50.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
सर्वज्ञ, वृत्रहंता, दूसरों का पालन करने वाले एवं वरणीय इंद्र हमारे बड़े एवं बीच वाले पुत्र की रक्षा करें. इंद्र आगे और पीछे से हमारी रक्षा करें. (१५)
EN English Translation
May indra, omniscient, omniscient, obedient to others, protect our eldest and middle son. Indra protect us from front and back. (15)