Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 50 • Mantra / Rik 5

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 5

8.50.5

Mantra ID: 8.50.5

श॒ग्ध्यू॒३॒॑ षु श॑चीपत॒ इन्द्र॒ विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ । भगं॒ न हि त्वा॑ य॒शसं॑ वसु॒विद॒मनु॑ शूर॒ चरा॑मसि ॥ (५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.50.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शक्ति के स्वामी इंद्र! अपने समस्त रक्षासाधनों द्वारा हमें अभीष्ट फल दो. हे शूर, यशस्वी एवं धनदाता इंद्र! हम भाग्य के समान तुम्हारी सेवा करेंगे. (५)

EN English Translation

O Lord of Power Indra! Give us the desired results through all your defense tools. O Shura, successful and wealthy Indra! We will serve you like luck. (5)

卐 HinduText AI