Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 50 • Mantra / Rik 8

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 8

8.50.8

Mantra ID: 8.50.8

त्वं पु॒रू स॒हस्रा॑णि श॒तानि॑ च यू॒था दा॒नाय॑ मंहसे । आ पु॑रंद॒रं च॑कृम॒ विप्र॑वचस॒ इन्द्रं॒ गाय॒न्तोऽव॑से ॥ (८)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.50.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम अनेक हजार एवं सौ गायों का समूह देने के लिए स्वीकृति देते हो. हम विविध उत्तम वचन बोलते हुए एवं नगरों का भेदन करने वाले इंद्र की स्तुति करते हुए अपनी रक्षा के हेतु उन्हें अपनी ओर ले आवेगे. (८)

EN English Translation

O Indra! You approve to give a group of several thousand and a hundred cows. We will take indra towards us for our protection, speaking various good words and praising him who penetrates the cities. (8)

卐 HinduText AI