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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 50 • Mantra / Rik 9

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 50 • ऋचा / मन्त्र 9

8.50.9

Mantra ID: 8.50.9

अ॒वि॒प्रो वा॒ यदवि॑ध॒द्विप्रो॑ वेन्द्र ते॒ वचः॑ । स प्र म॑मन्दत्त्वा॒या श॑तक्रतो॒ प्राचा॑मन्यो॒ अहं॑सन ॥ (९)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.50.9 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अनेक कर्म करने वाले, प्राचीन-क्रोध वाले एवं संग्राम में अपना महत्त्व प्रकाशित करने वाले इंद्र! कोई व्यक्ति बुद्धिरहित हो या बुद्धिमान्‌ हो, यदि वह तुम्हारी स्तुति करता है तो तुम्हारी दया से आनंद प्राप्त करता है. (९)

EN English Translation

O Indra, who does many deeds, is ancient and who reveals his importance in the struggle! Whether a person is without intellect or wise, if he praises you, he attains bliss by your mercy. (9)

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