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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 53 • Mantra / Rik 10

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 10

8.53.10

Mantra ID: 8.53.10

अ॒यं ते॒ मानु॑षे॒ जने॒ सोमः॑ पू॒रुषु॑ सूयते । तस्येहि॒ प्र द्र॑वा॒ पिब॑ ॥ (१०)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.53.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! मैं मानवों के बीच में तुम्हारे लिए सोमरस निचोड़ता हूं. तुम सोमरस के पास आओ एवं उसे पिओ. (१०)

EN English Translation

O Indra! I squeeze somras for you in the midst of humans. You come to Somers and drink it. (10)

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