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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 53 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 53 • ऋचा / मन्त्र 2

8.53.2

Mantra ID: 8.53.2

प॒दा प॒णीँर॑रा॒धसो॒ नि बा॑धस्व म॒हाँ अ॑सि । न॒हि त्वा॒ कश्च॒न प्रति॑ ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.53.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! तुम पणियों और यज्ञधनरहित लोगों को पैर से दबाकर पीड़ित करो. हे महान्‌ इंद्र! कोई भी तुम्हारा प्रतिद्वंद्वी नहीं है. (२)

EN English Translation

O Indra! You make the people and the people without sacrificial pain by pressing them with your feet. O great Indra! No one is your opponent. (2)

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