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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 54 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 54 • ऋचा / मन्त्र 12

8.54.12

Mantra ID: 8.54.12

नपा॑तो दु॒र्गह॑स्य मे स॒हस्रे॑ण सु॒राध॑सः । श्रवो॑ दे॒वेष्व॑क्रत ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.54.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

मुझ अरक्षित एवं दुःखी के संबंधी लोग हजारों धनों वाले हों. देवों की प्रसन्रता अन्न देती है. (१२)

EN English Translation

Let the relatives of me unguarded and grieved be of thousands of riches. The pleasure of gods gives food. (12)

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