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8.55.3
यः श॒क्रो मृ॒क्षो अश्व्यो॒ यो वा॒ कीजो॑ हिर॒ण्ययः॑ । स ऊ॒र्वस्य॑ रेजय॒त्यपा॑वृति॒मिन्द्रो॒ गव्य॑स्य वृत्र॒हा ॥ (३)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.55.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
शक्र सेवा करने योग्य, अश्वविद्या में निपुण, अद्भुत सोने के शरीर वाले एवं वृत्रनाशक इंद्र विपुल गायों को बाहर लाकर कंपित करते हैं. (३)
EN English Translation
Capable of performing shakra seva, proficient in horse learning, with a wonderful gold body and a vrithrasak, Indra brings out the abundant cows and vibrates. (3)