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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 12

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 12

8.58.12

Mantra ID: 8.58.12

सु॒दे॒वो अ॑सि वरुण॒ यस्य॑ ते स॒प्त सिन्ध॑वः । अ॒नु॒क्षर॑न्ति का॒कुदं॑ सू॒र्म्यं॑ सुषि॒रामि॑व ॥ (१२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.58.12 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वरुण! तुम शोभन देव हो. तुम्हारे समुद्ररूपी तालु में गंगा आदि सात नदियां इस प्रकार गिरती हैं जिस प्रकार सूर्य के सामने किरणें गिरती हैं. (१२)

EN English Translation

Hey Varun! You are Shobhan Dev. In your sea-like palate, seven rivers like the Ganga, etc., fall in the same way as the rays fall in front of the sun. (12)

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