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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 58 • Mantra / Rik 11

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 58 • ऋचा / मन्त्र 11

8.58.11

Mantra ID: 8.58.11

अपा॒दिन्द्रो॒ अपा॑द॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा अ॑मत्सत । वरु॑ण॒ इदि॒ह क्ष॑य॒त्तमापो॑ अ॒भ्य॑नूषत व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव ॥ (११)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.58.11 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

इंद्र ने सोमरस पिया एवं अग्नि ने सोमरस पिया. देवगण सोमरस पीकर तृप्त हुए. वरण सोमरस पीने के लिए यज्ञशाला में निवास करें. गाएं जिस प्रकार बछड़े से मिलने दौड़ती हैं, उसी प्रकार उक्थ मंत्र वरुण की स्तुति करते हैं. (११)

EN English Translation

Indra drank somras and agni drank somras. Devgan was satisfied by drinking somras. Stay in the yajnashala to drink the varan somras. Just as the cows run to meet the calf, the ukth mantras praise Varuna. (11)

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