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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 6 • Mantra / Rik 42

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 6 • ऋचा / मन्त्र 42

8.6.42

Mantra ID: 8.6.42

अस्माकं त्वा सुताँ उप वीतपृष्ठा अभि प्रयः. शतं वहन्तु हरयः.. (४२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.6.42 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! हमारा सोम एवं अन्न ग्रहण करने के लिए प्रशंसित पीठ वाले सौ घोड़े तुम्हें लावें. (४२)

EN English Translation

O Indra! May you bring a hundred horses with an admired back to receive our mon and grain. (42)

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