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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 60 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 60 • ऋचा / मन्त्र 2

8.60.2

Mantra ID: 8.60.2

न॒हि म॒न्युः पौरु॑षेय॒ ईशे॒ हि वः॑ प्रियजात । त्वमिद॑सि॒ क्षपा॑वान् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.60.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे प्रिय जन्म वाले अग्नि! पुरुषों का क्रोध तुम्हें बाधा नहीं पहुंचा सकता. तुम ही रात में तेजस्वी हो. (२)

EN English Translation

O beloved born agni! The anger of men can't hinder you. You're the only one stunning at night. (2)

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