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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 60 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 60 • ऋचा / मन्त्र 4

8.60.4

Mantra ID: 8.60.4

न तम॑ग्ने॒ अरा॑तयो॒ मर्तं॑ युवन्त रा॒यः । यं त्राय॑से दा॒श्वांस॑म् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.60.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अग्नि! तुम जिस हव्यदाता यजमान का पालन करते हो, उसे धनी एवं दानरहित लोग अपने से अलग नहीं कर सकते. (४)

EN English Translation

O agni! The husbandly host you follow cannot be separated from you by the rich and the unsung of charity. (4)

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