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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 68 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 68 • ऋचा / मन्त्र 2

8.68.2

Mantra ID: 8.68.2

अ॒भ्यू॑र्णोति॒ यन्न॒ग्नं भि॒षक्ति॒ विश्वं॒ यत्तु॒रम् । प्रेम॒न्धः ख्य॒न्निः श्रो॒णो भू॑त् ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.68.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम नंगों को ढकते हैं एवं सभी रोगियों की चिकित्सा करते हैं. सोम ऊंचे होने पर भी देखते हैं और लूले होकर भी चलते हैं. (२)

EN English Translation

Mon covers the nuns and treats all the patients. Soma sees even when he is high and walks even when lulle. (2)

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