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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 75 • Mantra / Rik 4

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 75 • ऋचा / मन्त्र 4

8.75.4

Mantra ID: 8.75.4

उ॒त त्यं वी॒रं ध॑न॒सामृ॑जी॒षिणं॑ दू॒रे चि॒त्सन्त॒मव॑से हवामहे । यस्य॒ स्वादि॑ष्ठा सुम॒तिः पि॒तुर्य॑था॒ मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम् ॥ (४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.75.4 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अश्विनीकुमारो! हम वीर, धन का उपभोग करने वाले, ऋजीश युक्त एवं दूरस्थित विष्णायु को बुलाते हैं. उसकी स्तुति भी मुझ पिता के समान ही सरस है. हमारी मित्रता को अलग मत करो. तुम यहां आकर अपने घोड़ों की लगाम अलग करो. (४)

EN English Translation

O Ashwinikumaro! We call veer, wealth-consuming, rijish-rich and remoted vishnuyu. His praise is just as simple as my father's. Don't separate our friendship. You come here and separate the reins of your horses. (4)

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