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8.75.5
ऋ॒तेन॑ दे॒वः स॑वि॒ता श॑मायत ऋ॒तस्य॒ शृङ्ग॑मुर्वि॒या वि प॑प्रथे । ऋ॒तं सा॑साह॒ महि॑ चित्पृतन्य॒तो मा नो॒ वि यौ॑ष्टं स॒ख्या मु॒मोच॑तम् ॥ (५)
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ऋग्वेद मन्त्र 8.75.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
हे अश्विनीकुमारो! सत्य के द्वारा सूर्य अपनी किरणें शांत करते हैं. उसके बाद वे सत्य के सींग के समान अपनी किरणों का विस्तार करते हैं. सूर्य युद्ध करने वाले शत्रुओं को वास्तव में पराजित करते हैं. हमारी मित्रता अलग न हो. तुम यहां आकर अपने घोड़ो की लगाम अलग करो. (५)
EN English Translation
O Ashwinikumaro! By truth, the sun calms its rays. After that they expand their rays like the horn of truth. The sun actually defeats the enemies who make war. Let our friendship be no different. You come here and separate the reins of your horses. (5)