Popular:
ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 81 • Mantra / Rik 15

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 81 • ऋचा / मन्त्र 15

8.81.15

Mantra ID: 8.81.15

स नो॑ वृष॒न्सनि॑ष्ठया॒ सं घो॒रया॑ द्रवि॒त्न्वा । धि॒यावि॑ड्ढि॒ पुरं॑ध्या ॥ (१५)

卐

HinduText AI से इस वैदिक मन्त्र का अर्थ समझें

ऋग्वेद मन्त्र 8.81.15 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

卐 AI से समझें

हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अभिलाषापूरक इंद्र! तुम सर्वाधिक धन देने वाली, शत्रुओं को भयभीत करने वाली, शञ्रुओं को भगाने वाली एवं अनेक को धारण करने वाली यज्ञक्रिया के द्वारा हमारा पालन करो. (१५)

EN English Translation

Oh, this desireful Indra! You follow us through the yajna kriyata that gives the most money, frightens enemies, drives away the devils and holds many. (15)

卐 HinduText AI