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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 81 • Mantra / Rik 22

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 81 • ऋचा / मन्त्र 22

8.81.22

Mantra ID: 8.81.22

आ त्वा॑ विश॒न्त्विन्द॑वः समु॒द्रमि॑व॒ सिन्ध॑वः । न त्वामि॒न्द्राति॑ रिच्यते ॥ (२२)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.81.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! सरिताएं जिस प्रकार सागर में गिरती हैं, उसी प्रकार सोमरस तुम में प्रवेश करे. कोई भी देव तुमसे बढ़कर नहीं है. (२२)

EN English Translation

O Indra! Just as the saritas fall into the sea, so may somers enter you. There is no god greater than you. (22)

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