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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 81 • Mantra / Rik 23

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 81 • ऋचा / मन्त्र 23

8.81.23

Mantra ID: 8.81.23

वि॒व्यक्थ॑ महि॒ना वृ॑षन्भ॒क्षं सोम॑स्य जागृवे । य इ॑न्द्र ज॒ठरे॑षु ते ॥ (२३)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.81.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे अभिलाषापूरक एवं जागरणशील इंद्र! तुम अपनी महिमा के द्वारा सोमरस पीने में सबसे अधिक हुए हो. हे इंद्र! सोमरस तुम्हारे उदर में प्रवेश करता है. (२३)

EN English Translation

This desireful and awakening Indra! You've been most involved in drinking somras by your glory. O Indra! The somras enters your abdomen. (23)

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