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ऋग्वेद

Mandal 8 • Sukta 81 • Mantra / Rik 24

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 8 • सूक्त 81 • ऋचा / मन्त्र 24

8.81.24

Mantra ID: 8.81.24

अरं॑ त इन्द्र कु॒क्षये॒ सोमो॑ भवतु वृत्रहन् । अरं॒ धाम॑भ्य॒ इन्द॑वः ॥ (२४)

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ऋग्वेद मन्त्र 8.81.24 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे वृत्रहंता इंद्र! सोमरस तुम्हारे उदर के लिए पर्याप्त हो. निचोड़ा गया सोमरस तुम्हारे शरीरों के लिए पर्याप्त हो. (२४)

EN English Translation

O Vrithrahanta Indra! Somers are enough for your stomach. The squeezed somers are enough for your bodies. (24)

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