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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 105 • Mantra / Rik 2

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 105 • ऋचा / मन्त्र 2

9.105.2

Mantra ID: 9.105.2

सं व॒त्स इ॑व मा॒तृभि॒रिन्दु॑र्हिन्वा॒नो अ॑ज्यते । दे॒वा॒वीर्मदो॑ म॒तिभिः॒ परि॑ष्कृतः ॥ (२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.105.2 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

देवों के रक्षक, नशीले, स्तुतियों द्वारा सुशोभित एवं प्रेरित सोम जल के साथ उसी प्रकार मिलाए जाते हैं, जिस प्रकार माता गाय अपने बछड़े को अपने थन से मिलाती है. (२)

EN English Translation

The protectors of the gods, intoxicated, adorned and inspired by the praises are mixed with som water in the same way that the mother cow mixes her calf with her trunk. (2)

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