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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 105 • Mantra / Rik 3

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 105 • ऋचा / मन्त्र 3

9.105.3

Mantra ID: 9.105.3

अ॒यं दक्षा॑य॒ साध॑नो॒ऽयं शर्धा॑य वी॒तये॑ । अ॒यं दे॒वेभ्यो॒ मधु॑मत्तमः सु॒तः ॥ (३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.105.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

ये सोम देवों के बल के साधन, वेगजनक और भक्ष्य बनते हैं एवं इंद्रादि देवों को मधुरता प्रदान करते हैं. (३)

EN English Translation

These somas become the instruments of force of the gods, the vegetative and the bhaakshya and give sweetness to the Indradi devas. (3)

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