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9.63.21
वृष॑णं धी॒भिर॒प्तुरं॒ सोम॑मृ॒तस्य॒ धार॑या । म॒ती विप्राः॒ सम॑स्वरन् ॥ (२१)
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ऋग्वेद मन्त्र 9.63.21 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
बुद्धि वाले ऋत्विज् अभिलाषापूरक एवं जल बरसाने वाले सोम को उंगलियों एवं स्तुतियों के साथ जल की धारा के रूप में प्रेरित करते हैं. (२१)
EN English Translation
The wise ritwijs inspire the desire-filled and water-showering Mon as a stream of water with fingers and hymns. (21)