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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 63 • Mantra / Rik 22

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 63 • ऋचा / मन्त्र 22

9.63.22

Mantra ID: 9.63.22

पव॑स्व देवायु॒षगिन्द्रं॑ गच्छतु ते॒ मदः॑ । वा॒युमा रो॑ह॒ धर्म॑णा ॥ (२२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.63.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे दीप्तिशाली सोम! धारा के रूप में गिरो. तुम्हारा नशीला रस आसक्त इंद्र के पास जावे. तुम अपने धारक रस द्वारा वायु को प्राप्त करो. (२२)

EN English Translation

O radiant Mon! Fall as stream. Go to indra, your intoxicating juice. You get to air by juice your holder. (22)

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