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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 96 • Mantra / Rik 22

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 96 • ऋचा / मन्त्र 22

9.96.22

Mantra ID: 9.96.22

प्रास्य॒ धारा॑ बृह॒तीर॑सृग्रन्न॒क्तो गोभिः॑ क॒लशा॒ँ आ वि॑वेश । साम॑ कृ॒ण्वन्सा॑म॒न्यो॑ विप॒श्चित्क्रन्द॑न्नेत्य॒भि सख्यु॒र्न जा॒मिम् ॥ (२२)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.96.22 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

सोम की बड़ी-बड़ी धाराएं निर्मित की जाती हैं. गाय के दूध, दही आदि से मिलकर सोम द्रोणकलशों में प्रवेश करते हैं. सामगान में कुशल एवं सब जानने वाले सोम साममंत्रों को गाते हुए इस प्रकार पात्रों में जाते हैं, जिस प्रकार लंपट मनुष्य अपने मित्र की पत्नी के पास जाता है. (२२)

EN English Translation

Large streams of mon are created. The soms consisting of cow's milk, curd etc. enter the dronakalshas. The skilled and all-knowing Som in the samagana goes into the characters while singing the sammantras, just as the lustful man goes to his friend's wife. (22)

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