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ऋग्वेद

Mandal 9 • Sukta 96 • Mantra / Rik 23

Rigveda (ऋग्वेद)

ऋग्वेद • मण्डल 9 • सूक्त 96 • ऋचा / मन्त्र 23

9.96.23

Mantra ID: 9.96.23

अ॒प॒घ्नन्ने॑षि पवमान॒ शत्रू॑न्प्रि॒यां न जा॒रो अ॒भिगी॑त॒ इन्दुः॑ । सीद॒न्वने॑षु शकु॒नो न पत्वा॒ सोमः॑ पुना॒नः क॒लशे॑षु॒ सत्ता॑ ॥ (२३)

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ऋग्वेद मन्त्र 9.96.23 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे शुद्ध होते हुए व स्तोताओं द्वारा प्रशंसित सोम! तुम शत्रुओं का नाश करते हुए इस प्रकार आते हो, जिस प्रकार यार अपनी प्रेयसी के पास जाता है. जिस प्रकार उड़ने वाला पक्षी वनवृक्षों पर बैठता है, उसी प्रकार सोम कलशों में स्थित होते हैं. (२३)

EN English Translation

Being pure and admired by the stoyas, Mon! You come to destroy your enemies in the same way that a man goes to his beloved. Just as the flying bird sits on the forest trees, so the somas are located in the kalash. (23)

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