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सामवेद

Chapter / Prapathak 16 • Dashati / Sukta 2 • Mantra 3

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 16 • दशती / सूक्त 2 • मन्त्र 3

16.2.3

Mantra ID: 16.2.3

एतं मृजन्ति मर्ज्यमुप द्रोणेष्वायवः । प्रचक्राणं महीरिषः ॥ (३)

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सामवेद मन्त्र 16.2.3 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

यजमान सोमरस को परिष्कृत कर के द्रोणकलश में भरते हैं. यह रसीला व अन्नों को उत्पन्न करने वाला है. (३)

EN English Translation

The host refines someras and fills it in dronalakash. It is succulent and food-producing. (3)

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