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सामवेद

Chapter / Prapathak 16 • Dashati / Sukta 8 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 16 • दशती / सूक्त 8 • मन्त्र 6

16.8.6

Mantra ID: 16.8.6

प्रजामृतस्य पिप्रतः प्र यद्भरन्त वह्नयः । विप्रा ऋतस्य वाहसा ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 16.8.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

दिव्य अग्नियां आकाश में भर जाती हैं. वे तीव्र गति से इंद्र को यज्ञ स्थान पर पहुंचा देती हैं. तब ब्राह्मणगण उन की स्तुति करते हैं. (६)

EN English Translation

Divine agnis fill the sky. She takes Indra to the yajna place at a fast pace. Then the Brahmins praise him. (6)

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