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सामवेद

Chapter / Prapathak 23 • Dashati / Sukta 3 • Mantra 8

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 23 • दशती / सूक्त 3 • मन्त्र 8

23.3.8

Mantra ID: 23.3.8

तव द्यौरिन्द्र पौँस्यं पृथिवी वर्धति श्रवः । त्वामापः पर्वतासश्च हिन्विरे ॥ (८)

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सामवेद मन्त्र 23.3.8 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! स्वर्गलोक और पृथ्वीलोक से आप के स्वरूप का विस्तार होता है. जल और पर्वत आप को अपना स्वामी मानते हैं. (८)

EN English Translation

O Indra! Your nature expands from heaven and earth. Water and mountains consider you as their master. (8)

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