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सामवेद

Chapter / Prapathak 3 • Dashati / Sukta 7 • Mantra 6

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 3 • दशती / सूक्त 7 • मन्त्र 6

3.7.6

Mantra ID: 3.7.6

यदिन्द्र शासो अव्रतं च्यावया सदसस्परि । अस्माकमँशुं मघवन्पुरुस्पृहं वसव्ये अधि बर्हय ॥ (६)

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सामवेद मन्त्र 3.7.6 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! आप यज्ञ में विघ्न डालने वालों को दंड देते हैं. आप दुष्टों को दंड दीजिए. आप धनवान हैं. आप हमारे घरों में सोमरस बढ़ाइए. (६)

EN English Translation

O Indra! You punish those who obstruct the yajna. You punish the wicked. You are rich. You increase somers in our homes. (6)

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