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सामवेद

Chapter / Prapathak 4 • Dashati / Sukta 11 • Mantra 5

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 4 • दशती / सूक्त 11 • मन्त्र 5

4.11.5

Mantra ID: 4.11.5

उषा अप स्वसुष्टमः सं वर्त्तयति वर्त्तनिँ सुजातता ॥ (५)

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सामवेद मन्त्र 4.11.5 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

उषा अच्छी तरह प्रकट हो कर अपनी किरणों से अपनी बहन रात के अंधेरे को दूर करती है. वह अपना मार्ग प्रकाशित करती है. (५)

EN English Translation

Usha appears well and removes the darkness of her sister night with her rays. She publishes her path. (5)

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