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6.4.10
यद्वर्चो हिरण्यस्य यद्वा वर्चो गवामुत । सत्यस्य ब्रह्मणो वर्चस्तेन मा सँ सृजामसि ॥ (१०)
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सामवेद मन्त्र 6.4.10 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य
हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)
स्वर्ण, गाय और सत्यज्ञान में जो तेजस्विता है, हम उस तेजस्विता को अपने में धारण करना (पाना) चाहते हैं. (१०)
EN English Translation
We want to hold the brilliance that is there in gold, cow and truth. (10)