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सामवेद

Chapter / Prapathak 9 • Dashati / Sukta 5 • Mantra 7

Samaveda (सामवेद)

सामवेद • प्रपाठक / अध्याय 9 • दशती / सूक्त 5 • मन्त्र 7

9.5.7

Mantra ID: 9.5.7

वृषा मतीनां पवते विचक्षणः सोमो अह्नां प्रतरीतोषसां दिवः । प्राणा सिन्धूनां कलशाँ अचिक्रददिन्द्रस्य हार्द्याविशन्मनीषिभिः ॥ (७)

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सामवेद मन्त्र 9.5.7 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे सोम! आप बुद्धि बढ़ाने वाले, विलक्षण, स्वर्गलोक व उषा को जानते हैं. आप दिनरात को प्रकाशित व जाग्रत करते हैं. आप मनीषियों द्वारा इंद्र के लिए परिष्कृत किए जाते हैं. आप आवाज करते हुए पात्र में प्रवाहित होते हैं. (७)

EN English Translation

O Mon! You know the one who increases intelligence, the unique, the heavenland and the Usha. You publish and awaken day and night. You are refined for Indra by mystics. You flow into the character while making a sound. (7)

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