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अथर्ववेद

Kanda 20 • Sukta 96 • Mantra 1

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 20 • सूक्त 96 • मन्त्र 1

20.96.1

Mantra ID: 20.96.1

ती॒व्रस्या॒भिव॑यसो अ॒स्य पा॑हि सर्वर॒था वि हरी॑ इ॒ह मु॑ञ्च । इन्द्र॒ मा त्वा॒ यज॑मानासो अ॒न्ये नि री॑रम॒न्तुभ्य॑मि॒मे सु॒तासः॑ ॥ (१)

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अथर्ववेद मन्त्र 20.96.1 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे इंद्र! यह जो हवि रूप अन्न देने वाला यजमान है, तुम इस के रथियों की रक्षा करो. हे इंद्र! सोमरस का संस्कार किया जा चुका है, इसलिए अपने घोड़ों को छोड़ कर यहां आओ और दूसरे यजमानों के यहां गमन मत करो. (१)

EN English Translation

O Indra! This one who is the host who gives food in the form of havi, you protect his chariots. O Indra! Someras has been cremated, so leave your horses and come here and do not go to other hosts. (1)

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