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अथर्ववेद

Kanda 10 • Sukta 1 • Mantra 30

Atharvaveda (अथर्ववेद)

अथर्ववेद • काण्ड 10 • सूक्त 1 • मन्त्र 30

10.1.30

Mantra ID: 10.1.30

यदि॒ स्थ तम॒सावृ॑ता॒ जाले॑न॒भिहि॑ता इव । सर्वाः॑ सं॒लुप्ये॒तः कृ॒त्याः पुनः॑ क॒र्त्रे प्र हि॑ण्मसि ॥ (३०)

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अथर्ववेद मन्त्र 10.1.30 का विस्तृत भावार्थ एवं वैदिक रहस्य

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हि हिन्दी अनुवाद (Hindi Translation)

हे कृत्याओ! यदि तुम अंधकार से ढकी हुई और जाल में फंसी हुई के समान विवश हो तो हम तुम सब को यहां से दूर भगाते हैं और तुम्हारे रचयिताओं के पास भेजते हैं. (३०)

EN English Translation

O act! If you are as bound as covered in darkness and trapped in a trap, we drive you away from here and send them to your creators. (30)

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